३३ . पकडे गये फिर चोर कन्हाई जब चुपचुपके माटी खायी
३३ . पकडे गये फिर चोर कन्हाई जब चुपचुपके माटी खायी
पकडे गये फिर चोर कन्हाई जब चुपचुपके माटी खायी
कोई गोपी आयी शिकायत लायी कान्हाको डांटे यशोदा माई ||धृ ०||
बोल लला मुख खोल लला इत उतको मत डोल लला
तेरी मुठ्ठी में क्या है जरा हां तो बता नही तो आज करूंगी पिटाई ||१||
मुख बांधे मोहन नही बोले हात जोड इत उतको डोले
मांने पकड लिया कस के जकड लिया फिर तो हाथ में लकडी उठाई ||२||
खोला मुख मोहन ने पल में आंख यशोदा की क्या देखे
जग सारा का सारा मुखमंडलने धारा माता की आखें भर आयी ||३||
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