६ . पापियोंके नाश को, धर्म के प्रकाश को

 ६ . पापियोंके नाश को, धर्म के प्रकाश को

पापियोंके नाश को, धर्म के प्रकाश को, श्रीरामजीकी सेना चली 
हरहर महदेव हरहर महदेव जय भवानी जय भवानी जय भवानी 
पाप अनाचार में घोर अंधः कार में एक नयी ज्योती जली ।।धृ०।।

निशिचरहीन करेंगे धरती यह प्रण है श्रीराम का 
जबतक काम न पूरण होगा नाम नहीं विश्राम का 
उसे मिटाने चले कि जिसका मंत्र वयं रक्षाम का 
समय आ चला निकट राम और रावण के संग्राम का 
तीन लोक धन्य है, देवता प्रसन्न है, आज मनोकामना फली ।।१।।

रामचंद्रजी के संग लक्ष्मण करमे लेकर बाण चले 
लिए विजय विश्वास ह्रदय में संगवीर हनुमान चले 
सेनासंग सुग्रीव नील नल अंगद छाती तान चले 
उसे बचाये कौन कि जिसका वध करने भगवान चले 
आगे रघुनाथ है, वीर साथ साथ है, एक से एक बली ।।२।।

प्रभु लंकापर डेरा डाले जब महासागर पार हो 
तब हो सफल अभियान हमारा तब सपना साकार हो 
पाप अनीति मिटे धरती से धरम की जयजयकार हो 
तब हो विजयी राम हमारे जब रावण की हार हो 
रामजीसे आस है, राम पे विश्वास है, रामजी करेंगे भली ।।३।।

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