३० . रंग दे चुनरियां

 ३० . रंग दे चुनरियां

रंग दे चुनरियां, रंग दे चुनरियां ,

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरियां  ।।धृ ०।।


ऐसी रंग दे के रंग नही छूटे
धोबिया धोए चाहे ये सारी उमरिया ।।१।।

लाल ना रंगउ मैं हरी ना रंगउ
अपने ही रंग मे रंग दे चुनरियां ।।२।।


बिना रंगाए मैं तो घर नही जाऊंगी

बीत ही जाए  चाहे ये सारी उमरीयाँ ।।३।।

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

प्रभु चरणं मे, हरी चरणं मे

श्याम चरणं मे लगी नज़रियां ।।४।।


जल से पतला कौन है
कौन भूमि से भारी
कौन अगनसे तेज है
कौन काजल से काली ?
जल से पतला… पतला
जल से पतला ज्ञान है
और पाप भूमि से भारी
क्रोध अगनसे से तेज है

और कलंक काजल से काली ।।


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