३१ . राम है जीवन कर्म हैं श्याम
३१ . राम है जीवन कर्म हैं श्याम
राम है जीवन कर्म हैं श्याम
बोलो हरे राम बोलो हरे श्याम ||धृ ०||
जो नर दुख में दुख नही माने
नही निंदा अस्तुति जाने
काम क्रोध जही परसे नाही
गुरु कृपा सोही नर सुख पाही
सुख का विधाता है तेरो नाम ||१||
कोटि वेद जाको जस गावे
विद्या कोटि पार ना पावे
अगम आपर पार नही जाको
नाम सुमीर सब जान सुख पाटो
अगम पंथ है राम और श्याम ||२||
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