३४ . दया कर दान भक्ती का हमे परमात्मा देना
३४ . दया कर दान भक्ती का हमे परमात्मा देना
दया कर दान भक्ती का हमे परमात्मा देना
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना ||धृ ०||
हमारे ध्यान में आओ प्रभू आखों में बस जाओ
अंधेरे दिल में आकरके परम ज्योती जगा देना ||१||
बहा दो प्रेम की गंगा दिलों में प्रेम का सागर
हमें आपस में मिलजुलकर प्रभू रहना सिखा देना ||२||
हमारा कर्म हो सेवा हमारा धर्म हो सेवा
सदा ईमान हो सेवा जो सेवकचर बना देना ||३||
वतन के वास्ते जीना वतन के वास्ते मरना
वतन पर जान फिदा करना प्रभू हमको सिखा देना ||४||
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