३७ . अजब हाल देखो नयी रोशनी का
३७ . अजब हाल देखो नयी रोशनी का
अजब हाल देखो नयी रोशनी का
की दुनियां में क्या क्या व्यसन बिक रहे है |
मन बिक चुके है तन बिक चुके है
सदन बिक चुके अब वतन बिक रहे है |
किरण बिग चुकी है हिरण बिक चुके है
परम बिक चुके अब धरम बिक रहे है |
बुजुर्ग के शाहाना इमान खोकर
पैसों के खातिर अपन बिक रहे है |
जरा जाके उनके मा बहनोंको पूछो
गोदी से कितनी ललन बिक रही है |
अनोखा तमाशा यहां का जितेंद्र
शरे आम दुल्हा दुल्हन बिक रहे है |
जमाने के मालिक जरा आँख खोलो
लंगोटी से चादर कफन बिक रहे हैं |
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