३९ . जब हि नगाडा बज हि गया है
३९ . जब हि नगाडा बज हि गया है
जब हि नगाडा बज हि गया है, सरहद पर शैतान का
नक़्शे पर से नाम मिटा दो, पापी पाकिस्तान का ॥धृ ० ॥
नक़्शे पर से नाम मिटा दो, पापी पाकिस्तान का ॥धृ ० ॥
कभी इधर से कभी उधर से घुसता है गुर्राता है
डल झेलम के मधु लहरों में गंदे पांव लगाता है
केसर पर बारूद छिड़कता अँगारे बरसाता है
न्यौता देता महाकाल को अपनी मौत बुलाता है
भूल गया है हरप-हरप लब खुद ही पाक कुरान का ॥ १ ॥
बोल दिया है धावा तो फिर शेरों कदम हटाना मत
तोपों के प्रलयंकर जबड़े तुम वापस पलटाना मत
सिद्धांतों की परिभाषा में अपने को उलझाना मत
धूल उड़ा देना पिंडी की पलभर दया दिखाना मत
फिर कब ऐसा वक्त आएगा लड्डू के भुगतान का ॥ २ ॥
अमन अहिंसा पंचशील के सरगम कुछ दिन गाओ मत
भड़क उठा है जरी तो फिर भड़की आग बुझाओ मत
पकी फसल की तरह काट दो जिन्दा एक बचाओ मत
लाख बार मर जाओ लेकिन माँ का दूध जलाओ मत
हिन्दुकुश पर गाडके आना झंडा हिन्दुस्थान का ॥ ३ ॥
खुलकर दो दो हाथ दिखाना संगाई तलवारों के
हथियारों से उत्तर देना दुश्मन के हुंकारों के
छाँट छाँट कर मुंड काटना घुसपैठी हत्यारों के
हमें भेट लेने आये है जयचंद गद्दारों के
गिनगीनकर बदला लेना जननी के अपमान का ॥ ४ ॥
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