२५ . वन्दे मातरम्

 २५ .  वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
सस्य श्यामलां मातरम्
शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् 
सुखदां वरदां मातरम् ॥१।।

कोटी कोटी कण्ठ कलकल निनाद कराले
कोटी कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम् ॥२।।

तुमि विद्या तुमि धर्म, 
तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे 
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे ॥३।।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम् ॥४।।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम् ॥ वन्दे मातरम् ।।
                          - बंकिमचंद्र चटर्जी 

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