२२ . जनगणमन अधिनायक जय हे

 २२ . जनगणमन अधिनायक जय हे

जनगणमन अधिनायक जय हे भारत भाग्यविधाता ।।धृ०।।

पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्राविड उत्कल वंगा 
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधितरंगा 
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे 
                                      गाहे तव जयगाथा 
जनगण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।१।।

अहरह तव आव्हान प्रचारित, शुनि तव उदार वाणी 
हिंदु बौद्ध सिख जैन पारसिक मुसलमान ख्रिस्टानी 
पूरब पश्चिम आसे तव सिंहासन पाशे 
                                    प्रेमहार हय गाथा
जनगण-ऐक्यविधायक जय हे भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।२।।
 
पतन अभ्युदय बंधर पंथा युगयुगधावित यात्री 
हे चिरसारथी तव रथचक्रे मुखरित पथ दिनरात्रि  
दारुण विप्लव माझे तव शंखध्वनि बाजे 
                                  संकट दुःख त्राता
जनगण-पथपरिचायक जय हे भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।३।।
 
घोर तिमिरघन निबिड निशीथे पीडित मूर्च्छित देशे 
जागृत छिल तव अविचल मंगल नतनयने अनिमेषे 
दुःस्वप्ने आतंके रक्षा करिले अंके 
                                 स्नेहमयी तुमि माता 
जनगण दुःखत्रायक जय हे भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।४।।

रात्रि प्रभातिल उदिल रविच्छवि पूर्व उदयगिरी भाले 
गाहे विहंगम पुण्य समीरण नवजीवन रस ढाले 
तव करुणारुण रागे निद्रित भारत जागे 
                                 तव चरणे नत माथा 
जय जय जय हे, जय राजेश्वर, भारत भाग्यविधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय, जय हे ।।५।। 
                                  - रविंद्रनाथ टागोर 

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