१८ . यह राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है

 १८ . यह राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है 

यह राष्ट्र केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है 
यह जीता जागता राष्ट्रपुरुष है
हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है 
कश्मीर इसका किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं
दिल्ली इसका दिल है, नर्मदा करधनी है 
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं
 इसक चरण धुलाता है, मलयनील विजन डुलाता है 
सावन के काले काले मेघ इसकी कुंतल केशराशी है 
चाँद और सूरज इसकी आरती उतारते है 
यह देवताओंकी भूमि है, यह संन्यासियोंकी भूमि है 
यह साम्राटोंकी भूमि है यह सेनानियोंकी भूमि है 
यह ऋषियोंकी भूमि है, यह संतोंकी भूमि है,यह तीर्थंकरोंकी भूमि है 
यह अर्पण की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है
यह वंदन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है
इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है
इसका कणकण हमें प्यारा है, इसका जनजन हमारा दुलारा है 
हम जिएंगे तो इसके लिए,
और मृत्युने बुलाया तो मरेंगे भी इसके लिए
और अगर मृत्यु के बाद हमारी हड्डीयाँ गंगाजीमे फेंक दी गयी 
और कोई कान लगाकर सुने तो एकही आवाज सुनाई देगी 
वन्दे मातरम - वन्दे मातरम
                                       - अटल बिहारी वाजपेयी 

Comments

Popular posts from this blog

४० . जिनके ओजस्वी वचनों से, गूँज उठा था विश्व गगन

४४ हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे माँ

४३ . ॐ जय जगदीश हरे