१५. स्वा वलंबी स्वाभिमानी भाव जगाना है स्वा वलंबी स्वाभिमानी भाव जगाना है, चलें गाँव की ओर, हमें फिर वैभव लाना है || हर घर में गो-माँ की सेवा, पशुधन का हो पालन, जल की रक्षा करने से हो, धरती माँ का पोषण | बने औषधि पंचगव्य से, खाद..... गोबर से, स्वच्छ रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे, भाव जगाना है, जड़ी-बूटी से खुशहाली, हमें गाँव में लाना है ||१|| गाँव में होगी जैविक खेती, जमीं के नेचे पानी, धान सब्जी फल और फूल से, सजेगी धरती सारी | कोई न होगा भूखा-प्यासा, पूरी होगी सबकी आशा, स्नेह और सहकारिता का, भाव जगाना है, कृषि-आधारित समृद्धि, हर गाँव में लाना है ||२|| ग्रामोद्योग विस्तार से सबका, निश्चित हो रोजगार, जिएं सादगी से सब रखें, मन में उच्च-विचार | गाँव का हर बच्चा हो शिक्षित, हर युवा संस्कारित निर्भिक, भारत माता के जय हो, यह भाव जगाना है, राम-राज्य के सपने को, साकार कराना है ||३|| ग्राम-नगर-वन के सब वासी, भारत की संतान, एक संस्कृति-एक धर्म है पुरखे सबके समान | ऊंच-नीच का भेद भुलाकर, कंधे से कंधा मिलाकर, समरसता का गीत गाकर, कदम बढ़ाना है, इस हेतु से तन-मन-धन, जीवन लगाना है ||४||